मैंने आज अपने डर के लिए एक खिड़की खोली— हवा भीतर आई, डर बाहर नहीं गया।
कविता-उत्तर
सुनने के बाद
आपमें क्या बचा?
अभी सुनीगीत नया गाता हूँअटल बिहारी वाजपेयी
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इस सप्ताह का संकेत
“वह छोटा साहस, जिसे किसी ने देखा नहीं।”
रात ने कहा, पूरा सूरज मत माँगो। मैंने हथेली खोली और एक जुगनू को अपना रास्ता मान लिया।